Vedic Astrology

वैदिक ज्योतिष ग्रहों को जानने की एक प्राचीन विद्या है। यह हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा प्रदत्त एक ज्ञान है। यह ग्रहों की गणितीय गणना है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि व्यक्ति को अपनी अनुकूल और प्रतिकूल स्थिति का ज्ञान हो जाता है, जिससे वह उसके अनुसार कार्य करता है तो विपरीत परिस्थितियों में भी उसे संबल मिलता है। पृथ्वी से कई प्रकाश वर्ष दूर नक्षत्रों का मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा? इसका अध्ययन वैदिक ज्योतिष में किया जाता है। ज्योतिष के द्वारा ज्ञात हो सकता है कि कौन-से ग्रह उस पर अच्छा प्रभाव डालेंगे और कौन-से ग्रह बुरा प्रभाव देंगे।
हर ग्रह का अपना एक तत्व होता है उस तत्व के द्वारा उस ग्रह के बुरे प्रभाव को कम किया जा सकता है। वर्तमान में वैदिक ज्योतिष संभावनाओं वाले क्षेत्र के रूप में उभर कर आया है। इस विद्या में कम्यूटर के प्रयोग से इसका क्षेत्र सरल एवं व्यापक हो गया है। भारत में ज्योतिष से सम्बंधित लगभग एक हजार से भी अधिक वेबसाइट्‍स हैं। विदेशों में ज्योतिष से संबंधित लगभग एक लाख से अधिक वेबसाइट्‍स हैं। युवा ज्योतिष विद्या का अध्ययन कर इसमें भी करियर बना सकते हैं।
वैदिक ज्योतिष के दो प्रकार हैं- 1. सिद्धांत ज्योतिष और 2. फलित ज्योतिष।
सिद्धांत ज्योतिष के अंतर्गत पंचाग आदि का निर्माण शामिल है।
फलित ज्योतिष के अंतर्गत भविष्य देखना, पत्रिका बनाना, ग्रहजन्य पीड़ा, निदान आदि का अध्ययन किया जाता है।
ज्योतिष के साथ में आध्या‍त्मिक जुड़ाव भी होना चाहिए।